लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। इसी मुद्दे पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने प्रेस वार्ता कर सरकार का पक्ष सामने रखा।
ऊर्जा मंत्री ने विद्युत कर्मियों की प्रस्तावित हड़ताल को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मचारियों के आंदोलन का सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि विद्युत आपूर्ति को बाधित करने वाली किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान ऊर्जा मंत्री ने विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न होने देने की बात कही। सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों और विभागीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख भी स्पष्ट किया गया।
वहीं, विद्युत कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों ने छंटनी, कर्मचारियों की वापसी और अनुबंध संबंधी समस्याओं को लेकर 5 अक्टूबर से धरने का ऐलान किया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और विद्युत कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत अहम मानी जा रही है। फिलहाल सरकार का जोर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने और आम उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने पर है।
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